
:अनुराग भट्ट और प्रो. आशुतोष कुमार भट्ट के नवाचार को भारत सरकार ने किया सम्मानित, स्वास्थ्य एवं डिजिटल हेल्थकेयर क्षेत्र में मिलेगा नया आयाम
हल्द्वानी।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू), हल्द्वानी ने शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है। विश्वविद्यालय के कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक निदेशक अनुराग भट्ट तथा स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज के निदेशक प्रो. आशुतोष कुमार भट्ट को उनके अभिनव शोध कार्य "कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित हृदय रोग जोखिम दृश्यांकन एवं विश्लेषण प्रणाली" के लिए भारत सरकार द्वारा डिज़ाइन पेटेंट प्रदान किया गया है।
यह पेटेंट डिज़ाइन्स एक्ट, 2000 एवं डिज़ाइन्स नियम, 2001 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है। विश्वविद्यालय के लिए यह उपलब्धि न केवल शोध क्षमता का प्रमाण है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीकों के उपयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

AI तकनीक से हृदय रोग जोखिम का होगा बेहतर विश्लेषण
यह अभिनव प्रणाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत डेटा विज़ुअलाइज़ेशन तकनीकों का उपयोग करते हुए हृदय रोग से जुड़े जोखिमों का वैज्ञानिक विश्लेषण करती है तथा उन्हें सरल और स्पष्ट रूप में प्रदर्शित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में डिजिटल हेल्थकेयर, चिकित्सा अनुसंधान और रोगों की समय रहते पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पेटेंट से जुड़ी प्रमुख जानकारी
इस डिज़ाइन का पंजीकरण डिज़ाइन संख्या 498410-001 के अंतर्गत 13 अप्रैल 2026 को श्रेणी 24-01 में किया गया, जबकि इसका प्रमाणन 11 जून 2026 को जारी हुआ। पेटेंट में अनुसंधानकर्ता के रूप में अनुराग भट्ट और प्रो. आशुतोष कुमार भट्ट के नाम दर्ज हैं।

विश्वविद्यालय परिवार ने दी शुभकामनाएं
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, पत्रकारिता विभाग के निदेशक प्रो. राकेश रयाल, प्रो. जीतेंद्र पाण्डे, कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने दोनों शोधकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की शोध एवं नवाचार की सशक्त परंपरा को और मजबूत करती है तथा राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाली है।
स्वास्थ्य और तकनीक के संगम की नई मिसाल
विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित यह नवाचार भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक, प्रभावी और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में अहम योगदान देगा। साथ ही यह विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को भी नवाचार के लिए प्रेरित करेगा।
