बादलों की बाहों में बसी मसूरी, संगीता बिजलानी बोलीं- प्रकृति की इस अनमोल धरोहर को सहेजना हम सबकी जिम्मेदारी
पहली बार मसूरी पहुंचीं अभिनेत्री, प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और शांत वातावरण ने जीता दिल

मसूरी। संवाददाता
पहाड़ों की रानी मसूरी का जादू हर आने वाले पर्यटक के दिल पर अपनी अलग छाप छोड़ता है। बादलों से लिपटी पहाड़ियां, देवदार और चीड़ के घने जंगल, ठंडी हवाएं और दूर-दूर तक फैली हरी-भरी वादियां हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यही अनुभव बॉलीवुड अभिनेत्री संगीता बिजलानी को भी हुआ, जब वह पहली बार मसूरी पहुंचीं। उन्होंने इस यात्रा को अपनी सबसे यादगार यात्राओं में से एक बताते हुए कहा कि देहरादून से मसूरी तक का सफर ऐसा महसूस करा रहा था, मानो वह बादलों के बीच उड़ते हुए किसी जादुई दुनिया की ओर बढ़ रही हों।

पत्रकारों से बातचीत में संगीता बिजलानी ने कहा कि उन्होंने देश-विदेश के कई खूबसूरत पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया है, लेकिन मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता, सुकून भरा वातावरण और यहां की ताजगी अलग ही अनुभव देती है। उन्होंने कहा कि यहां पहुंचकर मन को एक अलग शांति मिलती है और यही विशेषता मसूरी को अन्य पर्यटन स्थलों से अलग पहचान दिलाती है।
'प्रकृति की इस धरोहर को बचाना हम सबका कर्तव्य'
संगीता बिजलानी ने कहा कि मसूरी केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति की अनमोल धरोहर है। इसे स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी इसमें बराबर की भागीदारी निभानी होगी। यदि प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रहेगी, तभी आने वाली पीढ़ियां भी इसकी खूबसूरती का आनंद ले सकेंगी।
पर्यटन और पर्यावरण में जरूरी है संतुलन
अभिनेत्री ने कहा कि पर्यटन किसी भी क्षेत्र की पहचान और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार होता है, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिससे प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने बढ़ते प्रदूषण और अनियोजित विकास पर चिंता जताते हुए कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
फिल्मों में वापसी पर मुस्कुराकर दिया जवाब
फिल्मी दुनिया में वापसी के सवाल पर संगीता बिजलानी ने मुस्कुराते हुए कहा कि फिलहाल उन्होंने कोई योजना नहीं बनाई है। उनका कहना था कि जिंदगी में कुछ बातें समय पर छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि हर राज पहले से खुल जाए तो जीवन का रोमांच कम हो जाता है।
मसूरी से दिया खास संदेश
मसूरी की मनमोहक वादियों से प्रभावित संगीता बिजलानी ने अंत में लोगों से अपील की कि प्रकृति को केवल घूमने की जगह न समझें, बल्कि जीवन का आधार मानें। उन्होंने कहा कि यदि हम आज पर्यावरण की रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए मसूरी जैसी खूबसूरत धरोहरें सुरक्षित रह पाएंगी।