Breaking News:
Image not found
20 Jul, 2026 by Admin

हरिद्वार में गरजे राकेश टिकैत, वन गुर्जरों से लेकर कांवड़ यात्रा और छात्र आंदोलन तक सरकार पर साधा निशाना

महापंचायत में शामिल होने पहुंचे किसान नेता बोले— जंगल, जमीन और वन गुर्जरों के अधिकारों पर नहीं होने देंगे कोई समझौता, कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन और श्रद्धालुओं दोनों से की अपील

हरिद्वार।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत हरिद्वार के श्यामपुर कांगड़ी में आयोजित वन गुर्जरों के अधिकारों की महापंचायत में शामिल होने पहुंचे। हरिद्वार पहुंचने पर टोल प्लाजा पर किसानों और समर्थकों ने फूल-मालाओं के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में टिकैत ने वन गुर्जरों के अधिकार, जंगलों की सुरक्षा, कांवड़ यात्रा, छात्र आंदोलन और आगामी विधानसभा चुनाव समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

"वन गुर्जरों के अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेंगे"

राकेश टिकैत ने कहा कि महापंचायत का उद्देश्य वन गुर्जर समुदाय की समस्याओं और उनके अधिकारों को प्रमुखता से उठाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंगलों से जुड़े लोगों की आवाज़ लगातार अनसुनी की जा रही है। ऋषिकेश क्षेत्र में हो रही जंगलों की कटाई पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए स्थानीय महिलाएं तक संघर्ष कर रही हैं, लेकिन उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारतीय किसान यूनियन वन गुर्जरों के हकों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।

"कांवड़ यात्रा आस्था का पर्व, श्रद्धालुओं के सम्मान का रखें ध्यान"

आगामी कांवड़ यात्रा को लेकर टिकैत ने प्रशासन से अपील की कि शिवभक्तों के साथ सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार देश की आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कांवड़ियों से भी आग्रह किया कि वे अपनी क्षमता के अनुसार ही कांवड़ उठाएं, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।

"लाठीचार्ज से आंदोलन कमजोर नहीं, और मजबूत होते हैं"

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज पर प्रतिक्रिया देते हुए टिकैत ने कहा कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि आंदोलनों को दबाने की कोशिश अक्सर उन्हें और अधिक मजबूत बना देती है।

चुनाव और संसद के मुद्दे पर भी रखी बेबाक राय

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर टिकैत ने संभावना जताई कि चुनाव इस वर्ष के अंत में कराए जा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी मौसम में सरकारें जनता से बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं होता।

'वंदे मातरम्' को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह देश के सम्मान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उनके अनुसार, जो भी इस देश में रहता है, उसके लिए 'वंदे मातरम्' कहना किसी विवाद का विषय नहीं होना चाहिए।

महापंचायत में गूंजे अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे

महापंचायत के दौरान वन गुर्जरों के अधिकारों के साथ-साथ जंगलों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। किसान यूनियन ने संकेत दिए कि यदि इन मुद्दों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।