कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा—सैनिक सम्मान की आड़ में चुनावी राजनीति कर रही भाजपा, सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील वापस लेने की मांग
देहरादून, 10 सितंबर 2026। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया ने शहीद सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के परिवारों को मिलने वाली एकमुश्त अनुग्रह अनुदान राशि को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सैनिक परिवारों के सम्मान के नाम पर केवल चुनावी राजनीति कर रही है। बल्यूटिया ने कहा कि यदि सरकार शहीद सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहती है तो शहीद सैनिकों की वीरांगनाओं और आश्रितों को 10 लाख रुपये की एकमुश्त अनुग्रह अनुदान राशि तत्काल दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील वापस लेने की मांग भी की।

कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2014 में शासनादेश संख्या 169/XII-3/14-09(31)/2014, दिनांक 5 मार्च 2014 जारी कर शहीद सैनिक एवं अर्धसैनिक परिवारों के लिए 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि का प्रावधान किया था। इसमें वीरांगना को 6 लाख और माता-पिता को 4 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान था। परिस्थितियों के अनुसार राशि के वितरण की अलग-अलग व्यवस्था भी शासनादेश में की गई थी।
बल्यूटिया का आरोप है कि 2017 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद इस शासनादेश पर रोक लगा दी गई, जिसके बाद प्रभावित शहीद परिवारों ने न्यायालय का रुख किया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
बल्यूटिया ने बताया कि अनिता देवी एवं अन्य की याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 4 नवंबर 2020 को शहीद परिवारों के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद सरकार ने इस फैसले को डबल बेंच में चुनौती दी। डबल बेंच ने भी शहीद परिवारों को वर्ष 2014 के शासनादेश के तहत 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने के आदेश दिए। इसके बाद प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। बल्यूटिया के मुताबिक State of Uttarakhand बनाम Anita Devi एवं अन्य, SLP (C) No. 18372/2022 मामला अभी लंबित है।
‘सैन्य धाम की बात करने वाली सरकार अपील वापस ले’
बल्यूटिया ने कहा कि एक ओर भाजपा सरकार सैन्य धाम बनाने और सैनिक परिवारों के सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शहीद परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता के मामले में सुप्रीम कोर्ट तक चली गई है। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2014 के शासनादेश को उसी स्वरूप में दोबारा लागू किया जाए और सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील वापस लेकर शहीद सैनिक परिवारों को 10 लाख रुपये की एकमुश्त अनुग्रह राशि का लाभ दिया जाए।