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03 Sep, 2026 by Admin

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने के मामले में गुरुवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। हाईकोर्ट ने शिफ्टिंग के लिए प्रस्तावित भूमि और उसके आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं ने अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
यह याचिका राज्य आंदोलनकारी और अधिवक्ता रमन साह व अन्य की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नैनीताल के जिलाधिकारी द्वारा बेलबाबा मंदिर के पास रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि को हाईकोर्ट के लिए प्रस्तावित करना वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा-2 का उल्लंघन है।

रिजर्व फॉरेस्ट और हाथी कॉरिडोर का उठाया गया था मुद्दा

याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष कहा था कि प्रस्तावित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण हुआ है और यह इलाका हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत आता है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि का स्वरूप बदलने अथवा उसे डी-रिजर्व करने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक है।
याचिका में 15 जुलाई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उत्तराखंड सरकार की 12 अगस्त 2026 की अधिसूचना का भी हवाला दिया गया था। याचिकाकर्ता पक्ष का दावा था कि इन दस्तावेजों में भी संबंधित भूमि को फॉरेस्ट लैंड के रूप में माना गया है।

सरकार ने दलीलों का किया विरोध

राज्य सरकार की ओर से अदालत में याचिकाकर्ताओं के तर्कों का विरोध किया गया। सरकार का कहना था कि हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ रही है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि प्रस्तावित स्थल हाथी कॉरिडोर नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी।

अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

याचिका खारिज होने के बाद इस मामले की कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के संकेत हैं। याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे हाईकोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देंगे। ऐसे में नैनीताल से हल्द्वानी हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंच सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले 15 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की शिफ्टिंग से जुड़े पुराने आदेश को निरस्त करते हुए कहा था कि हाईकोर्ट की स्थापना या स्थानांतरण से जुड़े ऐसे मुद्दे प्रशासनिक पक्ष में तय किए जाने चाहिए। शीर्ष अदालत ने हल्द्वानी में चिन्हित भूमि का कब्जा हाईकोर्ट को सौंपने की दिशा में भी आदेश दिए थे।