
सीमित अवधि के लिए लागू विशेष योजना, वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे पर रहेगा फोकस
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने भविष्य निधि से जुड़े लंबे समय से लंबित विवादों को समाप्त करने और संस्थानों को अनुपालन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 'विश्वास 2026' योजना लागू की है। यह एक विशेष वन-टाइम विवाद समाधान योजना है, जिसके माध्यम से पात्र नियोक्ता पुराने मामलों का निपटारा अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया के तहत करा सकेंगे। योजना का उद्देश्य न्यायालयों और विभागों में लंबित मामलों की संख्या कम करना, उद्योगों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ घटाना तथा कर्मचारियों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जानिए क्या है विश्वास 2026 योजना?
विश्वास 2026 ऐसी विशेष योजना है, जिसमें भविष्य निधि अंशदान जमा करने में हुई देरी के कारण उत्पन्न विवादों को निर्धारित नियमों के तहत सुलझाने का अवसर दिया गया है। इससे उन प्रतिष्ठानों को राहत मिलेगी जिनके मामले लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। यह योजना केवल सीमित समय के लिए प्रभावी रहेगी।
कौन उठा सकता है लाभ?
योजना का लाभ ऐसे नियोक्ता, उद्योग, कंपनियां, संस्थान और प्रतिष्ठान उठा सकते हैं जिनके विरुद्ध पीएफ अंशदान में देरी के कारण क्षतिपूर्ति (Damages) या संबंधित विवाद लंबित हैं। कर्मचारियों के व्यक्तिगत पीएफ खाते, निकासी, पेंशन या क्लेम का इस योजना से कोई सीधा संबंध नहीं है।
क्या होगी राहत?
योजना के अंतर्गत पात्र मामलों में देरी से जुड़े वित्तीय दायित्वों का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। इससे कई नियोक्ताओं को पहले की तुलना में कम आर्थिक बोझ के साथ अपने पुराने मामलों का निपटारा करने का अवसर मिलेगा। साथ ही वर्षों से चल रहे विवादों के समाप्त होने से संस्थानों को कानूनी प्रक्रियाओं से भी राहत मिलेगी।
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन
EPFO ने आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल बनाया है। पात्र नियोक्ता EPFO के ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटल सिग्नेचर (DSC) या ई-साइन के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। योजना के प्रभावी संचालन के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों में विशेष व्यवस्था भी की गई है ताकि मामलों का समयबद्ध निस्तारण हो सके।
कर्मचारियों के हित रहेंगे पूरी तरह सुरक्षित
इस योजना से कर्मचारियों के पीएफ खाते में जमा राशि या उनके अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके विपरीत, यदि नियोक्ता पुराने विवादों का समाधान कर समय पर अंशदान जमा करना शुरू करते हैं तो कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।
क्यों अहम है यह योजना?
विशेषज्ञों का मानना है कि 'विश्वास 2026' केवल विवाद निपटाने की योजना नहीं, बल्कि बेहतर औद्योगिक माहौल और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे नियोक्ताओं और EPFO के बीच विश्वास बढ़ेगा, मुकदमेबाजी कम होगी और भविष्य निधि प्रणाली अधिक प्रभावी बन सकेगी।
यह योजना आम नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि उन नियोक्ताओं के लिए है, जिन पर पीएफ अंशदान देर से जमा करने के कारण जुर्माना लगाया गया है। 14 जून 2024 से पहले के मामलों में रियायती दर पर विवाद निपटाने का अवसर दिया जा रहा है, लेकिन ब्याज में कोई छूट नहीं मिलेगी।"
(आकाश वर्मा, क्षेत्रीय आयुक्त-द्वितीय, EPFO):
क्षेत्रीय आयुक्त आकाश वर्मा ने इस पूरी योजना को प्रभावी तरीके बताते हुए कहा की 14 जून 2024 से पहले के बकाया मामलों में योजना के तहत जुर्माने की दर को घटाकर 0.25% से 1% प्रतिमाह कर दिया गया है, जिससे पुराने विवादों का निस्तारण आसान होगा। हालांकि, धारा 7Q के तहत देय ब्याज की पूरी राशि पहले जमा करना अनिवार्य होगा, क्योंकि ब्याज पर किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई है। धोखाधड़ी, वित्तीय हेरफेर और गंभीर फर्जीवाड़े के मामलों को इस योजना से बाहर रखा गया है।
इस बीच, ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय हल्द्वानी की बकायेदार सूची में कुमाऊं के कई सरकारी उपक्रमों, सहकारी चीनी मिलों, नगर निकायों और अन्य संस्थानों पर कर्मचारियों का पीएफ अंशदान समय पर जमा न करने के कारण करोड़ों रुपये के जुर्माने और ब्याज का खुलासा हुआ है। इन संस्थानों के खिलाफ ईपीएफओ ने रिकवरी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

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