Breaking News:
Image not found
05 Sep, 2026 by Admin
।नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से फैल रही बीमारी और मौतों के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को तलब किया है। साथ ही जल संस्थान को क्षेत्र में स्वच्छ और संदूषणमुक्त पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

कई गांवों में दूषित पानी से बीमारी का आरोप

मामला नैनीताल से दिल्ली मार्ग पर करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित ज्योलिकोट और उसके आसपास के गांवों से जुड़ा है। गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल समेत आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल के कारण जलजनित बीमारियां फैलने की शिकायत सामने आई है। हालिया रिपोर्टों में क्षेत्र में मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की बात सामने आई है।

हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पेयजल व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने और लोगों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।

स्वास्थ्य संकट पर बढ़ी चिंता

दूषित पानी से बीमारी फैलने के बीच स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों की संख्या बढ़ी है और प्रशासन को स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को भी बंद करने जैसे कदम उठाने पड़े थे।
अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पेयजल के दूषित होने की स्थिति समय रहते क्यों नहीं रोकी गई और ग्रामीणों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने में लापरवाही कहां हुई