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27 Aug, 2026 by Admin

हल्द्वानी में नई गाड़ियों की नंबर प्लेट बनी मुसीबत, मुहूर्त और सरकारी फरमान के बीच फंसे ग्राहक


शुभ मुहूर्त में गाड़ी खरीदने की तैयारी, लेकिन नंबर प्लेट के लिए सरकारी नियमों का इंतजार; स्थानीय बाजार से पड़ोसी जिलों की ओर बढ़ रहा ग्राहकों का रुख

हल्द्वानी। नई गाड़ी खरीदना भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ एक खरीदारी नहीं, बल्कि शुभ मुहूर्त, पूजा-पाठ और नए सफर की शुरुआत से जुड़ा अवसर भी होता है।वही धातु शनि देव से भी जोड़कर देखा जाता है इसलिए कई ग्राहक महीनों पहले गाड़ी बुक कर लेते हैं और फिर ज्योतिषी से शुभ मुहूर्त निकलवाकर उसी दिन डिलीवरी लेने की तैयारी करते हैं। लेकिन हल्द्वानी में इन दिनों मुहूर्त और सरकारी फरमान के बीच ग्राहक ऐसा फंस गया है कि गाड़ी खरीदने से पहले अब नंबर प्लेट के लिए मुहूर्त देखना पड़ रहा है।कुमाऊं कमिश्नर के आदेश के बाद शोरूम से नई गाड़ी की डिलीवरी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) यानी स्थायी नंबर प्लेट लगने के बाद ही किए जाने की बाध्यता ने वाहन कारोबारियों और ग्राहकों के सामने नई परेशानी खड़ी कर दी है। बिना नंबर प्लेट या केवल परमिशन लेटर के आधार पर नई गाड़ी सड़क पर उतारने पर रोक के चलते कई ग्राहकों की डिलीवरी अटक गई है।

मुहूर्त तय, लेकिन नंबर का इंतजार बाकी

सबसे ज्यादा असमंजस उन ग्राहकों में है, जिन्होंने किसी खास दिन और समय को गाड़ी खरीदने के लिए शुभ माना है। ग्राहक गाड़ी की बुकिंग, भुगतान और पूजा तक की तैयारी कर लेता है, लेकिन अब सवाल यह है कि मुहूर्त पहले आएगा या नंबर प्लेट?
हास्यात्मक स्थिति यह है कि जिस गाड़ी की चाबी ग्राहक शुभ मुहूर्त में हाथ में लेने का सपना देख रहा है, उसकी डिलीवरी सरकारी व्यवस्था के अनुसार नंबर प्लेट आने पर ही संभव है। यानी पंडित जी ने समय बता दिया, लेकिन परिवहन व्यवस्था से यह पूछना पड़ रहा है कि “उस समय तक नंबर मिलेगा या नहीं?”

VIP नंबर की चाहत ने बढ़ाई परेशानी

मामला तब और पेचीदा हो जाता है, जब ग्राहक अपनी गाड़ी के लिए पसंदीदा फैंसी या VIP नंबर चाहता है। ऐसे नंबरों के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया और नीलामी में समय लग सकता है।
स्थानीय स्तर पर अस्थायी नंबर का विकल्प भी ग्राहकों के लिए राहत नहीं बन पा रहा है। वाहन कारोबारियों का कहना है कि अपने ही जिले में वाहन खरीदने की स्थिति में ग्राहकों को टेम्परेरी नंबर का विकल्प नहीं मिलने से स्थायी पंजीकरण की प्रक्रिया का इंतजार करना पड़ता है।
यही वजह है कि ग्राहक अब एक अजीब दुविधा में है गाड़ी हल्द्वानी से खरीदें तो नंबर का इंतजार, पड़ोसी जिले से खरीदें तो टेम्परेरी नंबर लेकर पसंदीदा नंबर का इंतजार।

रुद्रपुर और यूपी से खरीदारी का बढ़ता विकल्प

डीलरों के मुताबिक, रुद्रपुर समेत पड़ोसी जिलों और उत्तर प्रदेश से वाहन खरीदने पर ग्राहकों को निर्धारित अवधि के लिए टेम्परेरी नंबर मिल जाता है। ऐसे में ग्राहक नई गाड़ी लेकर घर आ सकता है और बाद में अपनी पसंद के नंबर के लिए प्रक्रिया पूरी कर सकता है।इस अंतर का सीधा असर हल्द्वानी के ऑटोमोबाइल कारोबार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कुछ ग्राहक स्थानीय शोरूम में बुकिंग रद्द कर पड़ोसी जिलों का रुख कर रहे हैं।
कारोबारियों का कहना है की जब सड़क सुरक्षा का उद्देश्य पूरे कुमाऊं के लिए समान है तो नियमों का असर भी पूरे क्षेत्र में समान क्यों नहीं होना चाहिए?

सुरक्षा के नाम पर व्यवस्था, लेकिन कागजी नंबर पर सवाल

डीलरों का एक तर्क यह भी है कि बाहरी जिलों से टेम्परेरी नंबर लेकर आने वाले वाहनों पर कई बार लोहे की नंबर प्लेट के स्थान पर कागज या स्टीकर आधारित नंबर दिखाई देता है। बारिश और पानी के मौसम में ऐसे कागजी नंबर कुछ ही दिनों में खराब होने की स्थिति में वाहन की पहचान मुश्किल हो सकती है।
ऐसे में कारोबारियों का सवाल है की अगर उद्देश्य वाहन की स्पष्ट पहचान और अपराध नियंत्रण है, तो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे स्थायी और स्पष्ट नंबर प्लेट जल्दी उपलब्ध हो, न कि ग्राहक एक व्यवस्था से बचने के लिए दूसरी व्यवस्था का सहारा लेने को मजबूर हो।

त्योहारी सीजन में कारोबारियों की चिंता

तीज-त्योहारों और आगामी शादी, दिवाली के सीजन को वाहन बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे समय में नई गाड़ियों की डिलीवरी रुकने या लंबी होने से डीलरों को बिक्री प्रभावित होने की चिंता है।
व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक शुभ दिन पर गाड़ी लेने की तैयारी करता है। लेकिन यदि उस दिन नंबर प्लेट उपलब्ध नहीं हुई तो ग्राहक के सामने दो ही रास्ते बचते हैं—मुहूर्त बदलें या शोरूम बदलें।

परिवहन विभाग ने नियमों को बताया उचित

एआरटीओ बिपिन कुमार सिंह के अनुसार, कमिश्नर का आदेश सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन कानून के प्रावधानों के अनुरूप है। विभाग की ओर से वाहन चालकों और खरीदारों से नियमों का पालन करने की अपील की गई है। साथ ही VIP नंबर को लेकर चल रही होड़ के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वाहन पंजीकरण कराने पर जोर दिया गया है।
हालांकि, विभागीय स्तर पर यह भी स्वीकार किया गया है कि नियमों की मौजूदा स्थिति से स्थानीय वाहन बिक्री और VIP नंबरों से मिलने वाले राजस्व पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है।

व्यवस्था में संतुलन

मामला सिर्फ नंबर प्लेट का नहीं रह गया है। इसके बीच ग्राहक, डीलर और परिवहन विभाग तीनों अपने-अपने नियम और मजबूरियां बता रहे हैं। ग्राहक चाहता है कि शुभ मुहूर्त पर गाड़ी मिले, डीलर चाहता है कि बिक्री न रुके, जबकि विभाग चाहता है कि नियमों का पालन हो। ऐसे में जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जिसमें सड़क सुरक्षा से समझौता भी न हो और ग्राहकों को अनावश्यक परेशानी भी न उठानी पड़े।
फिलहाल हल्द्वानी में स्थिति कुछ ऐसी बन गई है कि गाड़ी खरीदने से पहले लोग बैंक बैलेंस और मुहूर्त के साथ-साथ नंबर प्लेट का भी भविष्यफल पूछने लगे हैं। सवाल यही है कि शुभ मुहूर्त की घड़ी पहले आएगी या सरकारी प्रक्रिया पूरी होने की तारीख?